प्रधानमंत्री की कुर्सी साढ़े चार साल के बाद, खुशिय

"प्रधानमंत्री की कुर्सी साढ़े चार साल के बाद, खुशियों का शैलाब आया है , झूठी पत्तल में खाने बालों की थाली में पुलाव आया है, गरीबी देखने से दर्द होता था जिन आँखों में , उनमे आज लगाव आया है, देख लो चार दिन की चांदनी यारों , अँधेरी रात के बाद देश में चुनाव आया है । "

प्रधानमंत्री की कुर्सी साढ़े चार साल के बाद,
 खुशियों का शैलाब आया है ,
झूठी पत्तल में खाने बालों की
थाली में पुलाव आया है,
गरीबी देखने से दर्द होता था जिन आँखों में ,
उनमे आज लगाव आया है,
देख लो चार दिन की चांदनी यारों ,
अँधेरी रात के बाद देश में चुनाव आया है ।

प्रधानमंत्री की कुर्सी साढ़े चार साल के बाद, खुशियों का शैलाब आया है , झूठी पत्तल में खाने बालों की थाली में पुलाव आया है, गरीबी देखने से दर्द होता था जिन आँखों में , उनमे आज लगाव आया है, देख लो चार दिन की चांदनी यारों , अँधेरी रात के बाद देश में चुनाव आया है ।

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