मेरे ऐब की भी ग़र होती चाहत तुम्हें, मैं गुनहगार नहीं मज़ेदार होता...

मेरे ऐब की भी ग़र होती चाहत तुम्हें,
मैं गुनहगार नहीं मज़ेदार होता

मेरे ऐब की भी ग़र होती चाहत तुम्हें, मैं गुनहगार नहीं मज़ेदार होता

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