कि अपने ही पराए होते जा रहे हैं, मेरी होशियारी औ | हिंदी शायरी

"कि अपने ही पराए होते जा रहे हैं, मेरी होशियारी और हाजिर जवाबी को वजह बताकर। अब तो वक्त ने भी मुझसे किया है अजीब सा सौदा, मांग ली मेरी सारी मासूमियत तजुर्बों का दाम महंगा बताकर। ©Ojaswi Sharma"

कि अपने ही पराए  होते जा रहे हैं, 
मेरी होशियारी और हाजिर जवाबी को वजह बताकर। अब तो वक्त ने भी मुझसे किया है अजीब सा सौदा, 
मांग ली मेरी सारी मासूमियत तजुर्बों का दाम महंगा बताकर।

©Ojaswi Sharma

कि अपने ही पराए होते जा रहे हैं, मेरी होशियारी और हाजिर जवाबी को वजह बताकर। अब तो वक्त ने भी मुझसे किया है अजीब सा सौदा, मांग ली मेरी सारी मासूमियत तजुर्बों का दाम महंगा बताकर। ©Ojaswi Sharma

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