कोई तो वजह थी,जो तुम बन गए मेरी जिंदगी वरना यह प् | हिंदी Poem

"कोई तो वजह थी,जो तुम बन गए मेरी जिंदगी वरना यह प्यास तो,कब की थी बुझ चुकी सोचा कि अब,कोई चाहत ना तुमसे पर सह ना पाई,दूरी एक और घड़ी कह दिया चले जाओ अब दूर, पर खुद को और करीब कर दिया फिर भी कह रही हूं,तुमसे नहीं अब दिल लगी तुमसे नहीं अब दिल लगी खाली किताब के पन्नों में,तुम थे मेरी कहानियां जिंदगी के आलम में,तुम थे मेरी मौसिकी कुछ इस दरमियान,रंगहीन हो गई यह तस्वीर जैसे बागवान की,हर कली ही खो गई फिर भी कह रही हूं,तुमसे नहीं दिललगी तुमसे नहीं दिललगी वजह ने मेरी,वजह को मिटा दिया अश्रुओं ने मेरे,बेवजह रुला दिया हंसना तो जैसे,थी पहले की आदत अब तो मुस्कुराहट ने भी,बेरुख सा बना दिया पर अब भी यही कहूंगी, ना तुमसे थी कभी दिललगी, ना कभी होगी इस कविता के सच में,झूठ बात यही होगी इस कविता के सच में,झूठ बात यहीं होगी कनक लखेसर✍️"

कोई तो वजह थी,जो तुम बन गए मेरी जिंदगी 
वरना यह प्यास तो,कब की थी बुझ चुकी
सोचा कि अब,कोई चाहत ना तुमसे 
पर सह ना पाई,दूरी एक और घड़ी 
कह दिया चले जाओ अब दूर,
पर खुद को और करीब कर दिया 
फिर भी कह रही हूं,तुमसे नहीं अब दिल लगी 
                        तुमसे नहीं अब दिल लगी 
खाली किताब के पन्नों में,तुम थे मेरी कहानियां
जिंदगी के आलम में,तुम थे मेरी मौसिकी 
कुछ इस दरमियान,रंगहीन हो गई यह तस्वीर 
जैसे बागवान की,हर कली ही खो गई 
फिर भी कह रही हूं,तुमसे नहीं दिललगी
                        तुमसे नहीं दिललगी
वजह ने मेरी,वजह को मिटा दिया
अश्रुओं ने मेरे,बेवजह रुला दिया 
हंसना तो जैसे,थी पहले की आदत 
अब तो मुस्कुराहट ने भी,बेरुख सा बना दिया 
पर अब भी यही कहूंगी,
ना तुमसे थी कभी दिललगी, ना कभी होगी
           इस कविता के सच में,झूठ बात यही होगी 
           इस कविता के सच में,झूठ बात यहीं होगी
                 कनक लखेसर✍️

कोई तो वजह थी,जो तुम बन गए मेरी जिंदगी वरना यह प्यास तो,कब की थी बुझ चुकी सोचा कि अब,कोई चाहत ना तुमसे पर सह ना पाई,दूरी एक और घड़ी कह दिया चले जाओ अब दूर, पर खुद को और करीब कर दिया फिर भी कह रही हूं,तुमसे नहीं अब दिल लगी तुमसे नहीं अब दिल लगी खाली किताब के पन्नों में,तुम थे मेरी कहानियां जिंदगी के आलम में,तुम थे मेरी मौसिकी कुछ इस दरमियान,रंगहीन हो गई यह तस्वीर जैसे बागवान की,हर कली ही खो गई फिर भी कह रही हूं,तुमसे नहीं दिललगी तुमसे नहीं दिललगी वजह ने मेरी,वजह को मिटा दिया अश्रुओं ने मेरे,बेवजह रुला दिया हंसना तो जैसे,थी पहले की आदत अब तो मुस्कुराहट ने भी,बेरुख सा बना दिया पर अब भी यही कहूंगी, ना तुमसे थी कभी दिललगी, ना कभी होगी इस कविता के सच में,झूठ बात यही होगी इस कविता के सच में,झूठ बात यहीं होगी कनक लखेसर✍️

ना तुमसे थी कभी दिललगी❤️, ना कभी होगी💔
इस कविता के सच में,झूठ बात यही होगी 😓✍️
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