बेगुनाह हो कर भी सजा पाये हैं खुशियों पर भी गम क

"बेगुनाह हो कर भी सजा पाये हैं खुशियों पर भी गम के साये है। निन्द आँखों में चैन दिल में नहीं, जब से वो मेरी जिन्द़गी मे आये हैं ।"

बेगुनाह  हो कर भी सजा पाये हैं 
खुशियों पर भी गम के साये है।
निन्द आँखों में चैन दिल में नहीं,
जब से वो मेरी जिन्द़गी मे आये हैं ।

बेगुनाह हो कर भी सजा पाये हैं खुशियों पर भी गम के साये है। निन्द आँखों में चैन दिल में नहीं, जब से वो मेरी जिन्द़गी मे आये हैं ।

#जिन्द़गी#

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