शाम ढलते ढलते रात हो जाती है, पर क्या पता है,कुछ ल

"शाम ढलते ढलते रात हो जाती है, पर क्या पता है,कुछ लोग के जिंदगी में दर्द हर पल होता है,उनके जंहा में रात क्या दिन भी नहीं होता। (स्त्री का सम्मान कीजिए)"

शाम ढलते ढलते रात हो जाती है,
पर क्या पता है,कुछ लोग के जिंदगी में दर्द हर पल होता है,उनके जंहा में रात क्या दिन भी नहीं होता।
(स्त्री का सम्मान कीजिए)

शाम ढलते ढलते रात हो जाती है, पर क्या पता है,कुछ लोग के जिंदगी में दर्द हर पल होता है,उनके जंहा में रात क्या दिन भी नहीं होता। (स्त्री का सम्मान कीजिए)

#सम्मान

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