#Pehlealfaaz आखिर क्यों? एक दिन थी मैं सोई हुई,

"#Pehlealfaaz आखिर क्यों? एक दिन थी मैं सोई हुई, सपनों में खोई हुई सहसा एक परी आई,मुझे देख वह मुस्काई किरण तू क्यों है उदास? मुझे बता सारी बात तेरी समस्या सु्लझाऊँगी,जो पूछेगी बतलाऊँगी एक बात बताओ परी रानी,क्यों लड़ रहे हैं भाई-भाई ? क्या भुला चुके हैं वो ! हमने कैसे थी आजादी पाई ? क्यों भुला दिया बापू नेहरु को ?क्यों भुला दी गईं लक्ष्मी बाई ? क्या भूल चुके हम संदेश नायडू का, मिलके रहो तुम भाई-भाई बता तू ही क्यों हमने माँ इंदिरा की हत्या की बता सकती हो अब तक देश में, कितनी खून की नदियाँ बहीं? बता सकती हो कितनी साजिशें, देशद्रोहियों ने मिल शत्रु से की कुछ टकों के लालच में फंस ,देश के प्रति गद्दारी की इन सब प्रश्नों के उत्तर, दे सकती हो तो दे दो अब नहीं तो वापिस चली जाओ,अपने देश की धरती पर"

#Pehlealfaaz आखिर क्यों?
 
एक दिन थी मैं सोई हुई, सपनों में खोई हुई 
सहसा एक परी आई,मुझे देख वह मुस्काई
किरण तू क्यों है उदास? मुझे बता सारी बात 
तेरी समस्या सु्लझाऊँगी,जो पूछेगी बतलाऊँगी 
एक बात बताओ परी रानी,क्यों लड़ रहे हैं भाई-भाई ?
क्या भुला चुके हैं वो ! हमने कैसे थी आजादी पाई ?
क्यों भुला दिया बापू नेहरु को ?क्यों भुला दी गईं लक्ष्मी बाई ?
क्या भूल चुके हम संदेश नायडू का, मिलके रहो तुम भाई-भाई
बता तू ही क्यों हमने माँ इंदिरा की हत्या की 
बता सकती हो अब तक देश में, कितनी खून की नदियाँ बहीं? 
बता सकती हो कितनी साजिशें, देशद्रोहियों ने मिल शत्रु से की
कुछ टकों के लालच में फंस ,देश के प्रति गद्दारी की 
इन सब प्रश्नों के उत्तर, दे सकती हो तो दे दो अब
नहीं तो वापिस चली जाओ,अपने देश की धरती पर

#Pehlealfaaz आखिर क्यों? एक दिन थी मैं सोई हुई, सपनों में खोई हुई सहसा एक परी आई,मुझे देख वह मुस्काई किरण तू क्यों है उदास? मुझे बता सारी बात तेरी समस्या सु्लझाऊँगी,जो पूछेगी बतलाऊँगी एक बात बताओ परी रानी,क्यों लड़ रहे हैं भाई-भाई ? क्या भुला चुके हैं वो ! हमने कैसे थी आजादी पाई ? क्यों भुला दिया बापू नेहरु को ?क्यों भुला दी गईं लक्ष्मी बाई ? क्या भूल चुके हम संदेश नायडू का, मिलके रहो तुम भाई-भाई बता तू ही क्यों हमने माँ इंदिरा की हत्या की बता सकती हो अब तक देश में, कितनी खून की नदियाँ बहीं? बता सकती हो कितनी साजिशें, देशद्रोहियों ने मिल शत्रु से की कुछ टकों के लालच में फंस ,देश के प्रति गद्दारी की इन सब प्रश्नों के उत्तर, दे सकती हो तो दे दो अब नहीं तो वापिस चली जाओ,अपने देश की धरती पर

मेरी पहली कविता,जब मैं कक्षा सातवीं में पढ़ती थी. उस समय देश में आतंकवाद उग्र रूप धारण कर चुका था बस इसी व्यथा ने इस कविता को जन्म दिया.

आखिर क्यों?

एक दिन थी मैं सोई हुई
सपनों में खोई हुई
सहसा एक परी आई
मुझे देख वह मुस्काई

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