गैर था वो , कब अपना हुआ , पता ही ना चला ! ☺ धीरे- | हिंदी Poem

"गैर था वो , कब अपना हुआ , पता ही ना चला ! ☺ धीरे-धीरे वो पास आया , कब दिल का धडकना हुआ , पता ही ना चला ! 😊 रिश्ता उससे हल्का था , कब घना हुआ , पता ही ना चला ! 😍 मेरी हकीकत बन गया था वो , जाने कब सपना हुआ , पता ही‌‌ ना चला ! 😞"

गैर था वो , कब अपना हुआ ,
पता ही ना चला ! ☺

धीरे-धीरे वो पास आया , कब दिल का धडकना हुआ ,
पता ही ना चला ! 😊

रिश्ता उससे हल्का था , कब घना हुआ ,
पता ही ना चला ! 😍

मेरी हकीकत बन गया था वो , जाने कब सपना हुआ ,
पता ही‌‌ ना चला ! 😞

गैर था वो , कब अपना हुआ , पता ही ना चला ! ☺ धीरे-धीरे वो पास आया , कब दिल का धडकना हुआ , पता ही ना चला ! 😊 रिश्ता उससे हल्का था , कब घना हुआ , पता ही ना चला ! 😍 मेरी हकीकत बन गया था वो , जाने कब सपना हुआ , पता ही‌‌ ना चला ! 😞

सपना हुआ.... #sadlove

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