खुले आसमान को तरस रहे है मकान वाले, माकन को तरस र | हिंदी Shayari

"खुले आसमान को तरस रहे है मकान वाले, माकन को तरस रहे है खुले आसमान वाले, कमबख़्त ये आसमान और मकान में इतनी बैर क्यों है? Swati shikha laxmi"

खुले आसमान को 
तरस रहे है मकान वाले,
माकन को तरस रहे है 
खुले आसमान वाले,
कमबख़्त ये आसमान 
और मकान में 
इतनी बैर क्यों है?
Swati shikha laxmi

खुले आसमान को तरस रहे है मकान वाले, माकन को तरस रहे है खुले आसमान वाले, कमबख़्त ये आसमान और मकान में इतनी बैर क्यों है? Swati shikha laxmi

bas yuhiii.... #nojoto #Shayari #Aasman #makan

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