प्रेय और श्रेय इश्क़ के अंतर को समझने की , मेरा हर | हिंदी शायरी

"प्रेय और श्रेय इश्क़ के अंतर को समझने की , मेरा हर एक कोशिश तेरे लिए वाद हो जाता है । सिगरेट जताता हूं उस शख़्स को भूलने के लिए , सिगरेट जलते ही वो उसका चेहरा याद हो आता है ।। ©जय कुमार जनार्दन"

प्रेय और श्रेय इश्क़ के अंतर को समझने की ,
मेरा हर एक कोशिश तेरे लिए वाद हो जाता है ।
सिगरेट जताता  हूं उस  शख़्स को भूलने के लिए ,
 सिगरेट जलते ही वो उसका चेहरा याद हो आता है ।। 
      ©जय कुमार जनार्दन

प्रेय और श्रेय इश्क़ के अंतर को समझने की , मेरा हर एक कोशिश तेरे लिए वाद हो जाता है । सिगरेट जताता हूं उस शख़्स को भूलने के लिए , सिगरेट जलते ही वो उसका चेहरा याद हो आता है ।। ©जय कुमार जनार्दन

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