a-person-standing-on-a-beach-at-sunset रुख़ मोड़ गई चाहत, चार दिन की चाँदनी दिखा..! हमने ख़ुद को हारे इश्क़ में, मोहब्बत की छावनी लिखा..! बदलते रहे हालातों से हाल पता पूछने वाले, अपने भी छोड़ गए स्थिति भयावनी दिखा..! हर शख़्स देख दौलत का ढेर, हेर फेर यूँ मनभावनी बिका..! कोई मंजर पीठ पीछे खँजर, कहानी आस्तीन के साँपों की डरावनी दिखा..! कोई हमदर्द नहीं हिमालय सा तकलीफ़ों में, अकेला ही काफ़ी हूँ मैं दिल में ये आगज़नी जगा..! ©SHIVA KANT(Shayar) #SunSet #zindagikasafar