कभी कभी खुद को बहुत टूटा हुआ महसूस करती हूँ । चाहे

"कभी कभी खुद को बहुत टूटा हुआ महसूस करती हूँ । चाहे कितनी भी कोशिश करलूं मैं खुद को सँभालने की , पर नहीं संभाल पाती।ज़िन्दगी मेरी जैसे रुक सी गयी है , अब लगता है जैसे थम सी गयी हूँ मैं बस एक ही जगह पर। उम्मीदेँ जैसे मैंने खुद ही तोड़ दी हैं खुद से । हाँ गुनाह करती हूँ मैं खुद की ख्वाहिशों को मार कर ,दबाकर कहीं कोने में खुद में समाये रहती हूँ । धीरे धीरे अब हर मोड़ पर ज़िन्दगी अपने नए नए रंग दिखला रही है , रूबरू हो रही हूँ मैं ज़िन्दगी की हक़ीक़तों से , सही और गलत में फर्क क्या है? यह अब सिखा रही है ज़िंदगी। हाँ यह जानकर दिल थोड़ा जलता है मेरा पर आखिर सच तो कड़वा ही होता है,कोइ ग़म न होगा मुझे गर सच का यह कड़वा घूंट मैं पी जाऊं हस्ते हस्ते । तो यह सच का कड़वा घूंट पीना स्वीकार है मुझे। "

कभी कभी खुद को बहुत टूटा हुआ महसूस करती हूँ । चाहे कितनी भी कोशिश करलूं मैं खुद को सँभालने की , पर नहीं संभाल पाती।ज़िन्दगी मेरी जैसे रुक सी गयी है , अब लगता है जैसे थम सी गयी हूँ मैं बस एक ही जगह पर।

उम्मीदेँ जैसे मैंने खुद ही तोड़ दी हैं खुद से । हाँ गुनाह करती हूँ मैं खुद की ख्वाहिशों को मार कर ,दबाकर कहीं कोने में खुद में समाये रहती हूँ ।

धीरे धीरे अब हर मोड़ पर ज़िन्दगी अपने नए नए रंग दिखला रही है , रूबरू हो रही हूँ मैं ज़िन्दगी की हक़ीक़तों से , सही और गलत में फर्क क्या है? यह अब सिखा रही है ज़िंदगी। हाँ यह जानकर दिल थोड़ा जलता है मेरा पर आखिर सच तो कड़वा ही होता है,कोइ ग़म न होगा मुझे गर सच का यह कड़वा घूंट मैं पी जाऊं हस्ते हस्ते । तो यह सच का कड़वा घूंट पीना स्वीकार है मुझे।

कभी कभी खुद को बहुत टूटा हुआ महसूस करती हूँ । चाहे कितनी भी कोशिश करलूं मैं खुद को सँभालने की , पर नहीं संभाल पाती।ज़िन्दगी मेरी जैसे रुक सी गयी है , अब लगता है जैसे थम सी गयी हूँ मैं बस एक ही जगह पर। उम्मीदेँ जैसे मैंने खुद ही तोड़ दी हैं खुद से । हाँ गुनाह करती हूँ मैं खुद की ख्वाहिशों को मार कर ,दबाकर कहीं कोने में खुद में समाये रहती हूँ । धीरे धीरे अब हर मोड़ पर ज़िन्दगी अपने नए नए रंग दिखला रही है , रूबरू हो रही हूँ मैं ज़िन्दगी की हक़ीक़तों से , सही और गलत में फर्क क्या है? यह अब सिखा रही है ज़िंदगी। हाँ यह जानकर दिल थोड़ा जलता है मेरा पर आखिर सच तो कड़वा ही होता है,कोइ ग़म न होगा मुझे गर सच का यह कड़वा घूंट मैं पी जाऊं हस्ते हस्ते । तो यह सच का कड़वा घूंट पीना स्वीकार है मुझे।

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