हार और जीत हार है अमावस की काली रात तो , जीत पूर् | हिंदी कविता

"हार और जीत हार है अमावस की काली रात तो , जीत पूर्णमासी का निखरा चाँद । हार है अलसायी रात तो, जीत स्फूर्त नव प्रभात । हार है अनचाहा ख्वाब तो , जीत एक हसीं सौगात । हार है कैकयी तो , जीत राम का वनवास । हार है शूल तो , जीत पुष्प का उल्लास । हार है विवशता तो , जीत मृदु अहसास । हार है प्रलय तो , जीत नवनिर्माण की बिसात । हार बनती रही हो भले कभी , जीत का आधार पर । हार है मातम तो , जीत जश्न की परिणाम । हार है रावण का विनाश तो , जीत विजया दशमी का राम ॥"

हार और जीत हार है अमावस की काली रात तो , 
जीत पूर्णमासी का निखरा चाँद । 

हार है अलसायी रात तो, 
जीत स्फूर्त नव प्रभात । 

हार है अनचाहा ख्वाब तो , 
जीत एक हसीं सौगात । 

हार है कैकयी तो , 
जीत राम का वनवास । 

हार है शूल तो , 
जीत पुष्प का उल्लास । 

हार है विवशता तो , 
जीत मृदु अहसास । 

हार है प्रलय तो , 
जीत नवनिर्माण की बिसात । 

 हार बनती रही हो भले कभी , 
जीत का आधार पर । 

हार है मातम तो , 
जीत जश्न की परिणाम । 

हार है रावण का विनाश तो , 
जीत  विजया दशमी का राम ॥

हार और जीत हार है अमावस की काली रात तो , जीत पूर्णमासी का निखरा चाँद । हार है अलसायी रात तो, जीत स्फूर्त नव प्रभात । हार है अनचाहा ख्वाब तो , जीत एक हसीं सौगात । हार है कैकयी तो , जीत राम का वनवास । हार है शूल तो , जीत पुष्प का उल्लास । हार है विवशता तो , जीत मृदु अहसास । हार है प्रलय तो , जीत नवनिर्माण की बिसात । हार बनती रही हो भले कभी , जीत का आधार पर । हार है मातम तो , जीत जश्न की परिणाम । हार है रावण का विनाश तो , जीत विजया दशमी का राम ॥

#हारऔरजीत

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