शाखें ग़ुरबत पर ताज़ा कवल रखा है गन गुनाने के लिए सा

शाखें ग़ुरबत पर ताज़ा कवल रखा है गन गुनाने के लिए साजे गजल रखा है तोड़ दिया मैंने सूबेदार के मोहबत का गुरुर 
क्यूंकि 
मेरे कमरे में भी ताज़ महल रखा है

शाखें ग़ुरबत पर ताज़ा कवल रखा है गन गुनाने के लिए साजे गजल रखा है तोड़ दिया मैंने सूबेदार के मोहबत का गुरुर क्यूंकि मेरे कमरे में भी ताज़ महल रखा है

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