मैंने आज एक अजनबी से पूछा - तेरी यादों की गलियों में सबसे खूबसूरत ...

मैंने आज  एक अजनबी से पूछा -  तेरी यादों की गलियों में सबसे खूबसूरत याद कौन सी है?
 थोड़ा सा घबराया था, वह जवाब देने से पहले मुस्कुराया था ।
मैंने तो कुछ और ही सोचा था ,पर उसका जवाब कुछ और आया था
 उसने मेरे माथे पर हाथ रख कर बतलाया था 
जब जब मैं दिल खोलकर मुस्कुराया था 
मां के आंचल की मीठी सी छाँव थी, पापा के हाथों का स्पर्श ,
भाई बहनों का साथ में खेलना, यारों की मस्ती भरी शाम,
 मेरे एग्जाम में पास होने की खुशी या फिर मेरी पहली तनख्वाह आने में घर में बनी वो जलेबी,
 आज भी याद है मुझे अपने महबूब के संग खेली वह पहली होली,
 टीचर से मिली डांट है या कभी कबार मिलने वाली वह शाबाशी ,
दादी से सुनीबचपन की वह कहानियां है ,एक गांव की वह मिट्टी जो अक्सर उनके आंखों में भर जाती थी
 उसकी याद आज भी जिंदा है जब मेरी शरारत ने मुझे रुलाया था।
 मैं अपने ही सपनों में चूर घर से दूर आया था, वह नए शहरों में अपनों को तलाशा था
 दूर के दोस्त को भी दिल से गले लगाया था
 हर दिवाली पर घर जाने की बेसब्री, आज मुझे बच्चा बना जाती है 
मेरी होली आज भी कॉलेज की मस्ती की याद के बिना अधूरी है
 कैंटीन में समोसे के लिए चंदा जुटाना माजा की एक बोतल को पूरे कॉलेज में घूमकर खत्म करना 
कोई छूट गई हो तुम मुझे याद है वह बैलगाड़ी के पीछे जोर से भागना और राखी पर बोल बोल कर सबसे पैसे बटोरना।
 प्रैक्टिकल में देरी होने पर टीचरको जमकर कोसना और 1 दिन में जिंदगी भर के सपने देखना है
 कोई भी याद ऐसी है ही नहीं, जो खूबसूरत ना हो
 और उनके आने पर दिल में हंसी और दिमाग में सुकून  न आया 
हो आज जब भी आंख बंद करता हूं ,एक याद नहीं यादों के समंदर में गोते खा कर ही लौटता  हूं
 उसका जवाब सुनकर !मेरा दिल भी भर आया था, उसकी एक याद नहीं मुझे नहीं मेरा पिछला सब याद दिलाया था।

मैंने आज एक अजनबी से पूछा - तेरी यादों की गलियों में सबसे खूबसूरत याद कौन सी है? थोड़ा सा घबराया था, वह जवाब देने से पहले मुस्कुराया था । मैंने तो कुछ और ही सोचा था ,पर उसका जवाब कुछ और आया था उसने मेरे माथे पर हाथ रख कर बतलाया था जब जब मैं दिल खोलकर मुस्कुराया था मां के आंचल की मीठी सी छाँव थी, पापा के हाथों का स्पर्श , भाई बहनों का साथ में खेलना, यारों की मस्ती भरी शाम, मेरे एग्जाम में पास होने की खुशी या फिर मेरी पहली तनख्वाह आने में घर में बनी वो जलेबी, आज भी याद है मुझे अपने महबूब के संग खेली वह पहली होली, टीचर से मिली डांट है या कभी कबार मिलने वाली वह शाबाशी , दादी से सुनीबचपन की वह कहानियां है ,एक गांव की वह मिट्टी जो अक्सर उनके आंखों में भर जाती थी उसकी याद आज भी जिंदा है जब मेरी शरारत ने मुझे रुलाया था। मैं अपने ही सपनों में चूर घर से दूर आया था, वह नए शहरों में अपनों को तलाशा था दूर के दोस्त को भी दिल से गले लगाया था हर दिवाली पर घर जाने की बेसब्री, आज मुझे बच्चा बना जाती है मेरी होली आज भी कॉलेज की मस्ती की याद के बिना अधूरी है कैंटीन में समोसे के लिए चंदा जुटाना माजा की एक बोतल को पूरे कॉलेज में घूमकर खत्म करना कोई छूट गई हो तुम मुझे याद है वह बैलगाड़ी के पीछे जोर से भागना और राखी पर बोल बोल कर सबसे पैसे बटोरना। प्रैक्टिकल में देरी होने पर टीचरको जमकर कोसना और 1 दिन में जिंदगी भर के सपने देखना है कोई भी याद ऐसी है ही नहीं, जो खूबसूरत ना हो और उनके आने पर दिल में हंसी और दिमाग में सुकून न आया हो आज जब भी आंख बंद करता हूं ,एक याद नहीं यादों के समंदर में गोते खा कर ही लौटता हूं उसका जवाब सुनकर !मेरा दिल भी भर आया था, उसकी एक याद नहीं मुझे नहीं मेरा पिछला सब याद दिलाया था।

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