बेचैन मन तबीयत ऐसी हुई फिर जीने की सूरत ना हुई जि | हिंदी शायरी

"बेचैन मन तबीयत ऐसी हुई फिर जीने की सूरत ना हुई जिसे चाहा था उसे अपना ना सके जो मिला उससे मुहब्बत ना हुई।"

बेचैन मन तबीयत ऐसी हुई फिर जीने की सूरत
 ना हुई जिसे चाहा था उसे अपना ना सके 
जो मिला उससे मुहब्बत ना हुई।

बेचैन मन तबीयत ऐसी हुई फिर जीने की सूरत ना हुई जिसे चाहा था उसे अपना ना सके जो मिला उससे मुहब्बत ना हुई।

@Shalu Kumari @Madhu Kaur @Leelawati Sharma @Ruchi Rohella @Kalpana Kumari

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