अख़बार की झूठी खबरें , लोग पैसे से ख़रीद कर पढते ह | हिंदी शायरी

"अख़बार की झूठी खबरें , लोग पैसे से ख़रीद कर पढते हैं और क़ुरआन की सच्ची बातें लोग मुफ्त में भी नही पढते"

अख़बार की झूठी खबरें , लोग पैसे से 

ख़रीद कर पढते हैं

और क़ुरआन की सच्ची बातें लोग मुफ्त में

भी नही पढते

अख़बार की झूठी खबरें , लोग पैसे से ख़रीद कर पढते हैं और क़ुरआन की सच्ची बातें लोग मुफ्त में भी नही पढते

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