ये नया प्रभात है। फिर प्रफुल्लित गात है।। कलरवों क

"ये नया प्रभात है। फिर प्रफुल्लित गात है।। कलरवों का शोर है। इक सुहानी भोर है।। स्वप्न का आंगन बड़ा। किंकर्तव्यविमूढ़ मैं खड़ा।। प्रभु जी तुम्ही से आस है। पुरुषार्थ पर विश्वास है।। मैं सत्य पर चलता रहूँ। मैं प्रेम में ढलता रहूँ।। नूतन सुबह में राग हो। बस प्रेम हो अनुराग हो।। शुभ प्रभात।।।।"

ये नया प्रभात है।
फिर प्रफुल्लित गात है।।
कलरवों का शोर है।
इक सुहानी भोर है।।
स्वप्न का आंगन बड़ा।
किंकर्तव्यविमूढ़ मैं खड़ा।।
प्रभु जी तुम्ही से आस है।
पुरुषार्थ पर विश्वास है।।
मैं सत्य पर चलता रहूँ।
मैं प्रेम में ढलता रहूँ।।
नूतन सुबह में राग हो।
बस प्रेम हो अनुराग हो।।
शुभ प्रभात।।।।

ये नया प्रभात है। फिर प्रफुल्लित गात है।। कलरवों का शोर है। इक सुहानी भोर है।। स्वप्न का आंगन बड़ा। किंकर्तव्यविमूढ़ मैं खड़ा।। प्रभु जी तुम्ही से आस है। पुरुषार्थ पर विश्वास है।। मैं सत्य पर चलता रहूँ। मैं प्रेम में ढलता रहूँ।। नूतन सुबह में राग हो। बस प्रेम हो अनुराग हो।। शुभ प्रभात।।।।

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