दिल के समंदर में उठने वाली हर मौज दबाई है, भीड़ से अपनी अज़लत, मैं...

दिल के समंदर में उठने
वाली हर मौज दबाई है,

भीड़ से अपनी अज़लत,
मैंने हर रोज़ छिपाई है,

यूं ही आफ़रोज़ नहीं हो
गया है ये 'चिराग' यारों,

मैंने जलते दिल के नीचे,
उसकी सोज़ दफनाई है।

दिल के समंदर में उठने वाली हर मौज दबाई है, भीड़ से अपनी अज़लत, मैंने हर रोज़ छिपाई है, यूं ही आफ़रोज़ नहीं हो गया है ये 'चिराग' यारों, मैंने जलते दिल के नीचे, उसकी सोज़ दफनाई है।

दिल के समंदर में उठने
वाली हर मौज दबाई है,

भीड़ से अपनी अज़लत,
मैंने हर रोज़ छिपाई है,

यूं ही आफ़रोज़ नहीं हो
गया है ये 'चिराग' यारों,

मैंने जलते दिल के नीचे,
उसकी सोज़ दफनाई है।

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