सर्द रातें और चाय सर्द रातें और चाय , वो किताबों | हिंदी शायरी

"सर्द रातें और चाय सर्द रातें और चाय , वो किताबों में रात को खो जाना थोड़ी सर्दी एहसास होने पर चाय की चुस्कियां लेना ये होती थी कुछ सर्द रातों की चाय। यूं होटों में कपकपी सा लगना हाथों को टिठुर जाना कुछ गर्म सा एहसास दिलाए वो होती थी सर्दी कि चाय। होटों से लगा के एक ताजगी एहसास को पाना वो होती थी सर्दी कि रातों का चाय।"

सर्द रातें और चाय सर्द रातें और चाय ,

वो किताबों में रात को खो जाना थोड़ी सर्दी एहसास होने पर चाय की चुस्कियां लेना ये होती थी कुछ सर्द रातों की चाय।

यूं होटों में कपकपी सा लगना हाथों को टिठुर जाना कुछ गर्म सा एहसास दिलाए वो होती थी सर्दी कि चाय।

होटों से लगा के एक ताजगी एहसास को पाना वो होती थी सर्दी कि रातों का चाय।

सर्द रातें और चाय सर्द रातें और चाय , वो किताबों में रात को खो जाना थोड़ी सर्दी एहसास होने पर चाय की चुस्कियां लेना ये होती थी कुछ सर्द रातों की चाय। यूं होटों में कपकपी सा लगना हाथों को टिठुर जाना कुछ गर्म सा एहसास दिलाए वो होती थी सर्दी कि चाय। होटों से लगा के एक ताजगी एहसास को पाना वो होती थी सर्दी कि रातों का चाय।

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