"जब भी तुम मेरे सामने आ जाती हो..." Poetry By Ashish Parmar | Nojoto

जब भी तुम मेरे सामने आ जाती हो तब में कुछ बोल ही नही पाता क्या तुम वह ख़ामोशी को समझती हो। जब भी में तुम्हे देखता हूं और तुम्हारी नजर भी मुझ पर पड जाती है तब में नजरें जुका लेता हूं क्या वो जुकी नजरो को तुम समझती हो जब भी में लंच करके क्लासरूम में जल्दी चला आता हु और तुम्हारा इंतज़ार करता हु, क्या वो इंतज़ार तुम समझती हो। जब भी कोई दोस्त मजाक में तुमसे जूठ बोलता है तब में इसारे में सच बता देता हु , क्या वो इसारे तुम समझती हो जब भी तुम किसी और की तारीफ करती हो तो में थोड़ी सी स्माइल कर देता हु, क्या तुम वह स्माइल के पीछे की जलन समझती हो। क्या तुम समझती हो???. Follow Ashish Parmar. Download Nojoto App to get real time updates about Ashish Parmar & be part of World's Largest Creative Community to share Writing, Poetry, Quotes, Art, Painting, Music, Singing, and Photography; A Creative expression platform. Poetry By Ashish Parmar | Nojoto Poetry on Poetry. Poetry Poetry

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3 months ago

जब भी तुम मेरे सामने आ जाती हो तब में कुछ बोल ही नही पाता क्या तुम वह ख़ामोशी को समझती हो।

जब भी में तुम्हे देखता हूं और तुम्हारी नजर भी मुझ पर पड जाती है तब में नजरें जुका लेता हूं क्या वो जुकी नजरो को तुम समझती हो

जब भी में लंच करके क्लासरूम में जल्दी चला आता हु और तुम्हारा इंतज़ार करता हु, क्या वो इंतज़ार तुम समझती हो।

जब भी कोई दोस्त मजाक में तुमसे जूठ बोलता है तब में इसारे में सच बता देता हु , क्या वो इसारे तुम समझती हो

जब भी तुम किसी और की तारीफ करती हो तो में थोड़ी सी स्माइल कर देता हु, क्या तुम वह स्माइल के पीछे की जलन समझती हो।

क्या तुम समझती हो???

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Written By : Ashish Parmar

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