भूल जाता है भला कोई कहने भर ही से अजीब बात है जैसे बहाना चाहते थे पलट के एक मर्तबा भी ना देखा हमको अजीब बात है छुटकारा जैसे चाहते थे हमे नही चाहते थे तो कह दिया होता मिलाई क्यों निगाहे जब चुराना चाहते थे मियां ये किस शहर की चाह में भटके रस्ता हमे ही कह दिया होता पहुंचना चाहते थे कहा थे एतिबार के मियां हम से काबिल हम ही पागल थे जो तेरा भरोसा चाहते थे हमको कैसे उरूज तुमने दिखाए मोहसिन उठाया क्यों ज़मी से जब गिराना चाहते थे ΔհΜεD_ɌαZα_ΘυʀΞៜΗι #मनशा #MiyA