फासले, अना, वक्त, मसरूफियत, हिज्र के हर बहाने को,

"फासले, अना, वक्त, मसरूफियत, हिज्र के हर बहाने को, दफा कर के आओ। और मुहब्बत , तब तक मुकम्मल नहीं मानी जाएगी, जाओ, जाओ, पहले ज़माने को खफा कर के आओ ।। "

फासले, अना, वक्त, मसरूफियत, 
हिज्र के हर बहाने को, 
दफा कर के आओ।
और मुहब्बत ,
तब तक मुकम्मल नहीं मानी जाएगी,
जाओ, जाओ, पहले ज़माने को 
खफा कर के आओ ।।

फासले, अना, वक्त, मसरूफियत, हिज्र के हर बहाने को, दफा कर के आओ। और मुहब्बत , तब तक मुकम्मल नहीं मानी जाएगी, जाओ, जाओ, पहले ज़माने को खफा कर के आओ ।।

#mohabbat
#khafa
#nojotohindi

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