वो दोस्त था मेरा....शायद दोस्त से ज़्यादा...पता नहीं क्या था हमारे ...

वो दोस्त था मेरा....शायद दोस्त से ज़्यादा...पता नहीं क्या था हमारे बीच लेकिन जो भी था ख़ूबसूरत था। मेरी ज़िंदगी में आया पहला शख़्स....अलग था वो..सबसे अलग..मतलब वो पहला शख़्स था जो मेरे कहने से पहले ये समझ जाया करता था कि मैं उदास हूँ या ख़ुश, पता नहीं कैसे। ये ग़ज़ब की काबिलियत थी उसमें जो मुझे उसकी ओर खींचे चली जाती थी। उससे बातें करते हुए सब भूल जाया करती थी मैं। क़रीब था वो मेरे दिल के, मेरी ज़िंदगी में आया पहला शख़्स..साहिल था वो मेरा। वक़्त के साथ एहसासों में भी बढ़ोतरी हो रही थी....शायद मोहब्बत हो रही थी। और फ़िर एक दिन एक मुद्दे पर बहस हो गयी और..........दिन, हफ़्ते, और महीनों बीत गए शायद साल भी। आख़िरी message मेरा था और उसके जवाब का इंतज़ार भी मुझे था, लेकिन अब इंतज़ार की वज़ह कुछ और थी क्योंकि इंतज़ार की हद हो चुकी थी और अब वो जो था हमारे बीच शायद वो नहीं रहा था..या शायद था लेकिन कुछ कम था कुछ कमी सी थी। मैंने इंतज़ार किया था उसका लेकिन................
अब गुस्सा था मेरे दिल में, गुस्सा था कि क्यों उसने मेरे message का कोई जवाब नहीं दिया, अगर कुछ हुआ भी हमारे बीच तो क्या यूँ हमारा रिश्ता ही ख़त्म कर देगा वो ? क्या उसे मेरे होने या न होने से कोई फ़र्क नहीं पड़ता ? और अगर नहीं तो क्यों नहीं ?, मेरी या उसकी किसी ग़लती की सज़ा हमारे रिश्ते को क्यों दी उसने, कैसे उसने अकेले ये तय कर लिया कि हमारे रिश्ते का अंजाम क्या होगा ? 
सोचा था जब वो message करेगा तो ये सब सवाल उससे करूँगी लेकिन....अरसे बाद जब उसने message किया तो तानों से मैंने भी उसका स्वागत किया था। मेरा हर एक ताना उसे बड़ी ज़ोर से चुभा था और ये देख मेरा दिल बड़ा ख़ुश हुआ था।
लेकिन उन तानों के पीछे भी वो रिश्ता छुपा था जो मुझे ये एहसास दिला रहा था कि ए लड़की अब बस कर, याद कर ये वही है जो तेरे बिन कुछ कहे सब समझ जाया करता था, एक बार नहीं समझा तो क्या हुआ और भी तो लोग हैं जो नहीं समझते तुझे, बस वो भी उन्हीं का हिस्सा है अब।  #NojotoQuote

वो दोस्त था मेरा....शायद दोस्त से ज़्यादा...पता नहीं क्या था हमारे बीच लेकिन जो भी था ख़ूबसूरत था। मेरी ज़िंदगी में आया पहला शख़्स....अलग था वो..सबसे अलग..मतलब वो पहला शख़्स था जो मेरे कहने से पहले ये समझ जाया करता था कि मैं उदास हूँ या ख़ुश, पता नहीं कैसे। ये ग़ज़ब की काबिलियत थी उसमें जो मुझे उसकी ओर खींचे चली जाती थी। उससे बातें करते हुए सब भूल जाया करती थी मैं। क़रीब था वो मेरे दिल के, मेरी ज़िंदगी में आया पहला शख़्स..साहिल था वो मेरा। वक़्त के साथ एहसासों में भी बढ़ोतरी हो रही थी....शायद मोहब्बत हो रही थी। और फ़िर एक दिन एक मुद्दे पर बहस हो गयी और..........दिन, हफ़्ते, और महीनों बीत गए शायद साल भी। आख़िरी message मेरा था और उसके जवाब का इंतज़ार भी मुझे था, लेकिन अब इंतज़ार की वज़ह कुछ और थी क्योंकि इंतज़ार की हद हो चुकी थी और अब वो जो था हमारे बीच शायद वो नहीं रहा था..या शायद था लेकिन कुछ कम था कुछ कमी सी थी। मैंने इंतज़ार किया था उसका लेकिन................ अब गुस्सा था मेरे दिल में, गुस्सा था कि क्यों उसने मेरे message का कोई जवाब नहीं दिया, अगर कुछ हुआ भी हमारे बीच तो क्या यूँ हमारा रिश्ता ही ख़त्म कर देगा वो ? क्या उसे मेरे होने या न होने से कोई फ़र्क नहीं पड़ता ? और अगर नहीं तो क्यों नहीं ?, मेरी या उसकी किसी ग़लती की सज़ा हमारे रिश्ते को क्यों दी उसने, कैसे उसने अकेले ये तय कर लिया कि हमारे रिश्ते का अंजाम क्या होगा ? सोचा था जब वो message करेगा तो ये सब सवाल उससे करूँगी लेकिन....अरसे बाद जब उसने message किया तो तानों से मैंने भी उसका स्वागत किया था। मेरा हर एक ताना उसे बड़ी ज़ोर से चुभा था और ये देख मेरा दिल बड़ा ख़ुश हुआ था। लेकिन उन तानों के पीछे भी वो रिश्ता छुपा था जो मुझे ये एहसास दिला रहा था कि ए लड़की अब बस कर, याद कर ये वही है जो तेरे बिन कुछ कहे सब समझ जाया करता था, एक बार नहीं समझा तो क्या हुआ और भी तो लोग हैं जो नहीं समझते तुझे, बस वो भी उन्हीं का हिस्सा है अब। #NojotoQuote

आजकल रिश्ते messages के reply पर इतने निर्भर हैं कि अगर reply ना आए तो रिश्ता दम तोड़ देता है।
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