बादलों से ढक गए चांद और उसकी चांदनी, समाज के डर से | हिंदी Shayari

"बादलों से ढक गए चांद और उसकी चांदनी, समाज के डर से दब कर रह गए न जाने कितनों की प्रेम कहानी..."

बादलों से ढक गए चांद और उसकी चांदनी,
समाज के डर से दब कर रह गए न जाने कितनों की प्रेम कहानी...

बादलों से ढक गए चांद और उसकी चांदनी, समाज के डर से दब कर रह गए न जाने कितनों की प्रेम कहानी...

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