घुमड़ घुमड़ आ रहे हैं बादल बिन बरसे जा रहे हैं बाद | हिंदी Poem

घुमड़ घुमड़ आ रहे हैं बादल
बिन बरसे जा रहे हैं बादल...
तपती धरती वर्षा को तरसे
झूठा वादा कर रहे हैं बादल....
कहीं डुबा दिया शहर सारा
कहीं बूंदें बरसा रहे हैं बादल..
नहीं कसूर इसमें हमारा
उत्तर में कह रहे हैं बादल..
इंसानों ने कुदरत को है छेड़ा
कटते पेड़ दिखा रहे हैं बादल..
मत काटो पेड़ों को हरदम
बात ये समझा रहे हैं बादल...

घुमड़ घुमड़ आ रहे हैं बादल बिन बरसे जा रहे हैं बादल... तपती धरती वर्षा को तरसे झूठा वादा कर रहे हैं बादल.... कहीं डुबा दिया शहर सारा कहीं बूंदें बरसा रहे हैं बादल.. नहीं कसूर इसमें हमारा उत्तर में कह रहे हैं बादल.. इंसानों ने कुदरत को है छेड़ा कटते पेड़ दिखा रहे हैं बादल.. मत काटो पेड़ों को हरदम बात ये समझा रहे हैं बादल...

बारिश के बादल... #baarish #Nojoto #Nojotohindi #poem #Poetry #Quotes #baadal

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