किसी ने कहा रिश्तों को वक़्त देना सीखो, फिर वक़्त के साथ रिश्ते नहीं बदलेंगे। बात समझने की है की, बुरे वक्त पर ही ये अपनी करवट बदलेंगे, फितरत है विरासती रिश्ते की बुज़ुर्ग बच्चों के दीदार को तरसेंगे। बहन जो रुखसत हुई घर से कुछ अरसे में ही वो नैन भाई के इंतेज़ार में बरसेंगे, यही दस्तूर है ज़माने का अपनी ज़रूरत पर ये सब बदलेंगे। - राहुल कांत ©Raahul Kant किसी ने कहा रिश्तों को वक़्त देना सीखो, फिर वक़्त के साथ रिश्ते नहीं बदलेंगे। बात समझने की है की, बुरे वक्त पर ही ये अपनी करवट बदलेंगे, फितरत है विरासती रिश्ते की बुज़ुर्ग बच्चों के दीदार को तरसेंगे। बहन जो रुखसत हुई घर से कुछ अरसे में ही वो नैन भाई के इंतेज़ार में बरसेंगे, यही दस्तूर है ज़माने का अपनी ज़रूरत पर ये सब बदलेंगे। - राहुल कांत