इत्तु सा पैग़ाम कभी खुशी कभी गम के नाम। #nojoto # | English Stories

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इत्तु सा पैग़ाम कभी खुशी कभी गम के नाम।
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इस स्टोरी में जिन Sir का नाम लूँ गया वो मेरे college के हैं।
1. संजय गुप्ता सर जो geography department के H.O.D हैं।
2. लेखराज कंबोज Sir हैं जो हिंदी department के prof. हैं।
3. उन्मेश मिश्रा Sir हिंदी department के prof. हैं।
4. विनीत बाला mam geography department के प्रोफ. हैं।

ये बात 31 dec. 2016 की हैं। उस दिन लेखराज सर की Retirement थी । उस दिन की लिया मैंने Sir के लिया एक special watch बनाई थी। watch की खासियत ये थी कि ये complete watch paper से बनी थी और number की जगह लेखराज सर की picture थी। और sec. की सुई की जगह सर की picture थी सुई कितने भी चक्कर लगा लें ,सर की picture सीधे की सीधे रहती थी पर ये भी पता चल रहा थी की वो घूम रही हैं।
हुआ ये थी कि उस दिन clg में सभी teachers नहीं आये थे और मेरी आदत थी geography department में काम करता था,मैं अपने दोस्त सूरज की साथ depart. में watch की finishing कर रहा था और विनीत mam मेरे लिए depart. Open कर कुछ देर की लिया घर चली गयी। मैं और सूरज काम कर रहे थे depart. में किसी teacher को ना देख ओर काम के चक्कर में depart. बंद करने की कहने लगे (peon को),मैंने sir को बताया मैं ये काम कर रहा हूँ sir ने कुछ नहीं सुना और बेवजह मुझे अच्छे से डेटा। डेटा ही नहीं बहुत कुछ सुना दिया। उन्होंने तभी depart. बंद करवा दिया और मेरी watch अंदर रह गयी। उनके जाने की बाद peon से बात कर room open करवाया। watch बाहर लें आया और मिश्रा सर से कहा ये काम हैं ये ये चाहये। उन्होंने मेरी help की watch complete करने में ,watch complete कर में दोस्त के साथ confrans holl में गये जहाँ लेखराज sir के Retirement का program चल रहा था। सब उनके बारे में अच्छा-अच्छा बोल रहा थे। 1 hour के बार सब ने सर को gift देने start किया ,मेरा no. आया । मैं आगे गया सर को watch दी ,watch देख सब के होश उड़ गए। उड़ते हुए उनके होशे मैंने देखें। ऐसी watch उन्होंने कभी नहीं देखी थी। Sir भी बहुत खुश हुए ,मेरे साथ sir ने उस दिन 15-20 फ़ोटो click करवायी। मुझे भी अच्छा लगा,उसके बाद सब holl से बाहर आये ,तब mam ने sanjay sir को कहा कि आज आप ने अच्छा नहीं किया। इस तरह बच्चों को डांट कर bt सर तो सर हैं उन्होंने mam को भी डांट दिया। mam वहाँ से चली गयी और हमारी feeling sad वाली भी थी और खुशी वाली भी।
समझ नहीं आ रहा था क्या करें गम में डूबे या खुश हो। इसी बीच लेखराज ने हमें 4,5 बार बोल दिया कि खाना खा लो। हम बच्चे थे और वहाँ अंदर सब teacher थे तब sir हमारे साथ अंदर गये । हम दोनों ने सर के साथ खाया खाया। यहाँ भी सब हमें देख हैरान थे जिन्होंने मेरा नाम सुना था उन्हें आज पता चला था कि AJ ये हैं । कुछ teachers मेरी खिचाई करने लगें ,कहने लगें -- हूँ तुम ही हो AJ ,वही ने जो paper से कुछ ना कुछ बनाता रहना हैं, वहीं ना जो अपना Art कहे भी गुसा कर तारिफें बटोरते हो । इस तरह से खिचाई करने लगें। खाना खाने के बार सर ने फिर से हमारे साथ फोटी ली। उनका बर्ताव बहुत अच्छा था।

ये थी मेरी कहानी।
इसके बार हम mam से मिले ,वो भी नाराज़ नहीं संजय sir से और मैं भी,sir का बर्ताव मुझे बिलकुल अच्छा नहीं लगा और उसी पल से मैंने सर से बात बंद कर दी।15,20 दिनों तक ये कारवा चलता रहा ।फिर एक दिन संजय सर ने मुझे बुला कर ,तब की अपनी problem बताती और अपनी गलती मानी तब कही जाकर मैंने sanjay sir से बात start की।

ओर लेखराज Sir ने पूरे 1 year तक मेरे गिफ्ट देते हुए वाली फ़ोटो अपने फेसबुक की profile पर लगाई रखी।

(((((ये थे मेरी कहानी खुशी और गम जब साथ होते हैं तो क्या होता हैं।
Last में एक बात कहूंगा गलती की कोई माफ़ी नहीं होती क्योंकि हम उसे माफ कर एक ओर मौका दें रहे हैं गलती करने का।))))

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