अल्फ़ाज़ हसरतें थीं कुछ अधूरी सी भी, इल्तज़ा की थी | हिंदी Shayari

"अल्फ़ाज़ हसरतें थीं कुछ अधूरी सी भी, इल्तज़ा की थी जो जरूरी सी थीं। अल्फ़ाज़ ही बन कर रह गए वो तुम्हारे जज़्बात। अस्क बहते रहे हम सहते रहे।"

अल्फ़ाज़  हसरतें थीं कुछ अधूरी सी भी,

इल्तज़ा की थी जो जरूरी सी थीं।

अल्फ़ाज़ ही बन कर रह गए वो तुम्हारे जज़्बात।

अस्क बहते रहे हम सहते रहे।

अल्फ़ाज़ हसरतें थीं कुछ अधूरी सी भी, इल्तज़ा की थी जो जरूरी सी थीं। अल्फ़ाज़ ही बन कर रह गए वो तुम्हारे जज़्बात। अस्क बहते रहे हम सहते रहे।

Title:- अल्फाज़

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