चैन मन को न आएगा अब, रात बाहों में भर लो मुझे। उम् | हिंदी कविता

"चैन मन को न आएगा अब, रात बाहों में भर लो मुझे। उम्र हो जाएगी दोगुनी, अपनी सांसों में भर लो मुझे।। दूर कोयल लगी बोलने, पी पपीहे बुलाने लगे, चांद भी छत पे अब अा गया, फूल बेला के गाने लगे।। जैसे चकवे मिले बाग में, रात बाहों में भर लो मुझे।। उम्र हो जाएगी...... रातरानी में खोया पवन, जुगनू शाखों में छुपने लगे। शांत होकर नदी भी रुकी, लब किनारों से मिलने लगे।। खोया तारों में आकाश भी,रात बाहों में भर लो मुझे।। उम्र हो जाएगी ..... -. shiva awasthi"

चैन मन को न आएगा अब, रात बाहों में भर लो मुझे।
उम्र हो जाएगी दोगुनी, अपनी सांसों में भर लो मुझे।।

दूर कोयल लगी बोलने, पी पपीहे बुलाने लगे,
चांद भी छत पे अब अा गया, फूल बेला के गाने लगे।।
जैसे चकवे मिले बाग में, रात बाहों में भर लो मुझे।।
उम्र हो जाएगी......

रातरानी में खोया पवन, जुगनू शाखों में छुपने लगे।
शांत होकर नदी भी रुकी, लब किनारों से मिलने लगे।।
खोया तारों में आकाश भी,रात बाहों में भर लो मुझे।।
उम्र हो जाएगी .....
                                  -. shiva awasthi

चैन मन को न आएगा अब, रात बाहों में भर लो मुझे। उम्र हो जाएगी दोगुनी, अपनी सांसों में भर लो मुझे।। दूर कोयल लगी बोलने, पी पपीहे बुलाने लगे, चांद भी छत पे अब अा गया, फूल बेला के गाने लगे।। जैसे चकवे मिले बाग में, रात बाहों में भर लो मुझे।। उम्र हो जाएगी...... रातरानी में खोया पवन, जुगनू शाखों में छुपने लगे। शांत होकर नदी भी रुकी, लब किनारों से मिलने लगे।। खोया तारों में आकाश भी,रात बाहों में भर लो मुझे।। उम्र हो जाएगी ..... -. shiva awasthi

चैन मन को न आएगा अब, रात बाहों में भर लो मुझे।
उम्र हो जाएगी दोगुनी, अपनी सांसों में भर लो मुझे।।

दूर कोयल लगी बोलने, पी पपीहे बुलाने लगे,
चांद भी छत पे अब अा गया, फूल बेला के गाने लगे।।
जैसे चकवे मिले बाग में, रात बाहों में भर लो मुझे।।
उम्र हो जाएगी......

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