कड़वा सच सारे झूठ लिख-पढ़ कर भी बाजारों में बेच लेता | हिंदी विचार

"कड़वा सच सारे झूठ लिख-पढ़ कर भी बाजारों में बेच लेता गर खून में गद्दारी होती तो हजारों में एक होता! दिल से सच्चा हूँ तो एक आम आदमी हूँ साब जरा फ़रेबी होता तो मैं भी मैग्सेसे जीत लेता!! ©बृजेन्द्र 'बावरा'"

कड़वा सच सारे झूठ लिख-पढ़ कर भी बाजारों में बेच लेता
गर खून में गद्दारी होती तो हजारों में एक होता!
दिल से सच्चा हूँ तो एक आम आदमी हूँ साब
जरा फ़रेबी होता तो मैं भी मैग्सेसे जीत लेता!!
                                ©बृजेन्द्र 'बावरा'

कड़वा सच सारे झूठ लिख-पढ़ कर भी बाजारों में बेच लेता गर खून में गद्दारी होती तो हजारों में एक होता! दिल से सच्चा हूँ तो एक आम आदमी हूँ साब जरा फ़रेबी होता तो मैं भी मैग्सेसे जीत लेता!! ©बृजेन्द्र 'बावरा'

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