"जीवन के पर्दे पर, हम-तुम खेल र..." Poetry By Pratibha Singh (kuch ankahe alfaaz) | Nojoto

जीवन के पर्दे पर, हम-तुम खेल रहे है.. कुछ कहे कुछ अनकहे शब्दों को झेल रहे है.. हम उन्हें अपना और वो किसी और को अपना कह रहे है.. जीवन के पर्दे पर, हम-तुम खेल रहे है.. अनदेखी कुछ दीवारे, कुछ अनकहे रिश्तो को तोड़ रही है.. बेबस सी ये निगाहे, अब बस उनकी ही बाँट जोह रही है.. सच ही तो है, जरा गौर से देखो ना.. जीवन के पर्दे पर, हम-तुम खेल रहे है.. हम उनकी चाहत और वो मेरी बेबसी भी समझ रहे है.. पर दुनिया की कुछ रीति-रिवाजो, और रश्मो-कश्मो में बस जूझ रहे है.. हमने-तुमने अपनी-अपनी कह दी सारी बातें भी, फिर भी देखो ना कैसे.. जीवन के पर्दे पर, हम-तुम अब भी खेल रहे है.. #poetry #humtum #kuchankahealfaaz #jivan #khel. Follow Pratibha Singh (kuch ankahe alfaaz) . Download Nojoto App to get real time updates about Pratibha Singh (kuch ankahe alfaaz) & be part of World's Largest Creative Community to share Writing, Poetry, Quotes, Art, Painting, Music, Singing, and Photography; A Creative expression platform. Poetry By Pratibha Singh (kuch ankahe alfaaz) | Nojoto Poetry on Poetry, khel, HumTum, kuchankahealfaaz, jivan. Poetry Poetry, khel Poetry, HumTum Poetry, kuchankahealfaaz Poetry, jivan Poetry

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3 months ago

#poetry #humtum #kuchankahealfaaz #jivan #khel

जीवन के पर्दे पर, हम-तुम खेल रहे है.. 
कुछ कहे कुछ अनकहे शब्दों को झेल रहे है.. 
हम उन्हें अपना और वो किसी और को अपना कह रहे है.. 
जीवन के पर्दे पर, हम-तुम खेल रहे है.. 

अनदेखी कुछ दीवारे, कुछ अनकहे रिश्तो को तोड़ रही है.. 
बेबस सी ये निगाहे, अब बस उनकी ही बाँट जोह रही है.. 
सच ही तो है, जरा गौर से देखो ना.. 
जीवन के पर्दे पर, हम-तुम खेल रहे है.. 

हम उनकी चाहत और वो मेरी बेबसी भी समझ रहे है.. 
पर दुनिया की कुछ रीति-रिवाजो, 
और रश्मो-कश्मो में बस जूझ रहे है.. 
हमने-तुमने अपनी-अपनी कह दी सारी बातें भी, 
फिर भी देखो ना कैसे..
जीवन के पर्दे पर, हम-तुम अब भी खेल रहे है..

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Pratibha Singh (kuch ankahe alfaaz)

Written By : Pratibha Singh (kuch ankahe alfaaz)

कुछ अनकहे अल्फ़ाज मिलते हैं यहाँ.. कुछ बन्द पड़े दराज़ खुलते हैं यहाँ...कुछ खोई हुई परछाईयो की पहचान मिलती हैं यहाँ.. कुछ बिखरे से पन्नो की किताब छपती हैं यहाँ... My poems in my voice are available on you tube, please listen, like & subscribe. Pratibha Singh (kuch ankahe alfaaz)

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