अनजान थे जिस दर्द से कल तक, आज यूं उससे वास्ता हो | हिंदी शायरी

"अनजान थे जिस दर्द से कल तक, आज यूं उससे वास्ता हो गया, हम अकेले थे अकेले ही रहे , वक़्त चलता गया और तन्हां रास्ता हो गया।।"

अनजान थे जिस दर्द से कल तक, आज यूं उससे वास्ता हो गया, हम अकेले थे अकेले ही रहे , वक़्त चलता गया और तन्हां रास्ता हो गया।।

अनजान थे जिस दर्द से कल तक, आज यूं उससे वास्ता हो गया, हम अकेले थे अकेले ही रहे , वक़्त चलता गया और तन्हां रास्ता हो गया।।

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