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दाग दुनिया ने दिए जख़्म ज़माने से मिले। हम को तोहफ

दाग दुनिया ने दिए जख़्म ज़माने से मिले।
हम को तोहफे ये तुम्हें दोस्त बनाने से मिले।।

हम तरसते ही तरसते ही तरसते ही रहे।
वो फलाने से फलाने से फलाने से मिले।।

कभी लिखवाने गए ख़त कभी पढ़वाने गए।
हम हसीनों से इसी हाले बहाने से मिले।।

इक नया जख़्म मिला एक नई उम्र मिली।
जब किसी शहर में कुछ यार पुराने से मिले।।

एक हम ही नहीं फिरते हैं लिए किस्सा-ए-गम।
उन के खामोश लबों पर भी फसाने से मिले।।

©Raj Guru
  #मिले  Heena Neha verma poonam atrey कवि संतोष बड़कुर Jashvant