"इंसान हो! थोड़ा इंसानियत दिखाया..." Poetry By Neeraj Pandey | Nojoto

इंसान हो! थोड़ा इंसानियत दिखाया करो राह चलते तुम्हारी फब्तियां उन्हें डराती हैं वो शर्माती हैं ,सकुचाती हैं सबसे कह नहीं पाती हैं उन पर नहीं थोड़ा खुद पर तरस खाया करो इंसान हो! थोड़ा इंसानियत दिखाया करो मार देते हो उन्हें कोख में किसी के लिए स्वप्न हैं वो किसी का रत्न हैं वो तुम्हारे लिए जख्म इसलिए खत्म हैं वो उन्हें बचाया करो उन्हें पढ़ाया करो इंसान हो! थोड़ा इंसानियत दिखाया करो लेते हो दहेज उनसे कहते हो बोझ हैं वो चाहे पूजा हो,मारिया हो या फिर अफरोज हों वो अपनी अंतरात्मा की समझाया करो इंसान हो! थोड़ा इंसानियत दिखाया करो. Follow Neeraj Pandey. Download Nojoto App to get real time updates about Neeraj Pandey & be part of World's Largest Creative Community to share Writing, Poetry, Quotes, Art, Painting, Music, Singing, and Photography; A Creative expression platform. Poetry By Neeraj Pandey | Nojoto Poetry on Poetry. Poetry Poetry

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3 months ago

इंसान हो! थोड़ा इंसानियत दिखाया करो
राह चलते तुम्हारी फब्तियां
उन्हें डराती हैं
वो शर्माती हैं ,सकुचाती हैं
सबसे कह नहीं पाती हैं
उन पर नहीं थोड़ा खुद पर तरस खाया करो
इंसान हो! थोड़ा इंसानियत दिखाया करो
मार देते हो उन्हें कोख में
किसी के लिए स्वप्न हैं वो
किसी का रत्न हैं वो
तुम्हारे लिए जख्म
इसलिए खत्म हैं वो
उन्हें बचाया करो उन्हें पढ़ाया करो
इंसान हो! थोड़ा इंसानियत दिखाया करो
लेते हो दहेज उनसे
कहते हो बोझ हैं वो
चाहे पूजा हो,मारिया हो
या फिर अफरोज हों वो
अपनी अंतरात्मा की समझाया करो
इंसान हो! थोड़ा इंसानियत दिखाया करो

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