काश के पढ़ पाते दरिया फिर बहना कितना आसान होता मिलन | हिंदी शायरी

"काश के पढ़ पाते दरिया फिर बहना कितना आसान होता मिलना ही था समंदर से,थी मंज़िल वही सफ़र यूँ न बईमान होता"

काश के पढ़ पाते दरिया
फिर बहना कितना आसान होता
मिलना ही था समंदर से,थी मंज़िल वही
सफ़र यूँ न बईमान होता

काश के पढ़ पाते दरिया फिर बहना कितना आसान होता मिलना ही था समंदर से,थी मंज़िल वही सफ़र यूँ न बईमान होता

#पारस #दरिया #सफर #मंज़िल #समंदर

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