मत छेड़ आतिशों को सुलग उठी तो जला देंगी मत खेल बार | हिंदी शायरी और ग़ज़

"मत छेड़ आतिशों को सुलग उठी तो जला देंगी मत खेल बारिशों में तूफ़ान ले आई तो डुबा देंगी किसी के हालात पर सवालात भी वाजिब नहीं किस्मत ही तो है पलट जाए तो तस्वीर बदल देंगी रखना संभाल के अपने गरूर के ज़ालिम सरूर को सिर्फ एक ठोकर ही तुझे तेरी औकात बता देगी बबली गुर्जर ©Babli Gurjar"

 मत छेड़ आतिशों को सुलग उठी तो जला देंगी
मत खेल बारिशों में तूफ़ान ले आई तो डुबा देंगी
किसी के हालात पर सवालात भी वाजिब नहीं
किस्मत ही तो है पलट जाए तो तस्वीर बदल देंगी
रखना संभाल के अपने गरूर के ज़ालिम सरूर को
सिर्फ एक ठोकर ही तुझे तेरी औकात बता देगी
बबली गुर्जर

©Babli Gurjar

मत छेड़ आतिशों को सुलग उठी तो जला देंगी मत खेल बारिशों में तूफ़ान ले आई तो डुबा देंगी किसी के हालात पर सवालात भी वाजिब नहीं किस्मत ही तो है पलट जाए तो तस्वीर बदल देंगी रखना संभाल के अपने गरूर के ज़ालिम सरूर को सिर्फ एक ठोकर ही तुझे तेरी औकात बता देगी बबली गुर्जर ©Babli Gurjar

औकात

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