ईदगाह से जब नन्हा हामिद चिमटा दादी के लिए लाया था

"ईदगाह से जब नन्हा हामिद चिमटा दादी के लिए लाया था मुंशी जी ने तब हम सब को प्यार का सच्चा अर्थ समझाया था फिर नमक के दारोदर से उन्होंने हमको परिचित करवाया था ईमानदारी और खुद्दारी का मुकम्मल रूप दिखाया था नमन आपके चरित्र को नमन आपके विचार को कोटी कोटी प्रणाम है आपके पुरुषार्थ को"

ईदगाह से जब नन्हा हामिद चिमटा दादी के लिए लाया था
मुंशी जी ने  तब हम सब को प्यार का सच्चा अर्थ समझाया था
फिर नमक के दारोदर से उन्होंने हमको परिचित करवाया था
ईमानदारी और खुद्दारी का मुकम्मल रूप दिखाया था
नमन आपके चरित्र को नमन आपके विचार को
कोटी कोटी प्रणाम है आपके पुरुषार्थ को

ईदगाह से जब नन्हा हामिद चिमटा दादी के लिए लाया था मुंशी जी ने तब हम सब को प्यार का सच्चा अर्थ समझाया था फिर नमक के दारोदर से उन्होंने हमको परिचित करवाया था ईमानदारी और खुद्दारी का मुकम्मल रूप दिखाया था नमन आपके चरित्र को नमन आपके विचार को कोटी कोटी प्रणाम है आपके पुरुषार्थ को

नमन है गुरु देव आपको

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