झुमका याद है तुम्हें... नए झुमके पहनकर आई थी, थोड़ | हिंदी Poem

"झुमका याद है तुम्हें... नए झुमके पहनकर आई थी, थोड़ा शरमाई थी, थोड़ा इतरा कर जुल्फों को हटायी थी। गलती हुई थी मुझसे... मेरी नजरें झुमको से न टकराई थी। इसके बाद... कितना बवाल मचाया था तुमने, सच्ची बहुत डराया था तुमने, फिर जब कभी... मिले हम तुम, मेरी नजरें तुम्हारी झुमको को ढूंढा करती थी। हाय! रे तेरे झुमके... हाय! हाय! रे तेरे नखरे..."

झुमका याद है तुम्हें...
नए झुमके पहनकर आई थी,
थोड़ा शरमाई थी,
थोड़ा इतरा कर जुल्फों को हटायी थी।
गलती हुई थी मुझसे...
मेरी नजरें झुमको से न टकराई थी।
इसके बाद... कितना बवाल मचाया था तुमने,
सच्ची बहुत डराया था तुमने,
फिर जब कभी... मिले हम तुम,
मेरी नजरें तुम्हारी झुमको को ढूंढा करती थी।
हाय! रे तेरे झुमके...
हाय! हाय! रे तेरे नखरे...

झुमका याद है तुम्हें... नए झुमके पहनकर आई थी, थोड़ा शरमाई थी, थोड़ा इतरा कर जुल्फों को हटायी थी। गलती हुई थी मुझसे... मेरी नजरें झुमको से न टकराई थी। इसके बाद... कितना बवाल मचाया था तुमने, सच्ची बहुत डराया था तुमने, फिर जब कभी... मिले हम तुम, मेरी नजरें तुम्हारी झुमको को ढूंढा करती थी। हाय! रे तेरे झुमके... हाय! हाय! रे तेरे नखरे...

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