सफ़र हमेंशा अकेले ही तय करना पड़ता है,, मंज़िल तक पहु | हिंदी शायरी

"सफ़र हमेंशा अकेले ही तय करना पड़ता है,, मंज़िल तक पहुंचते पहुंचते,, जिस्म को भी जलाना पड़ता है...!!!"

सफ़र हमेंशा अकेले ही तय करना पड़ता है,,
मंज़िल तक पहुंचते पहुंचते,,
जिस्म को भी जलाना पड़ता है...!!!

सफ़र हमेंशा अकेले ही तय करना पड़ता है,, मंज़िल तक पहुंचते पहुंचते,, जिस्म को भी जलाना पड़ता है...!!!

#Akele #nojoto

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