*गुलाबी होंठ तेरे है, नशीली आँख लगती है।* | हिंदी शायरी

"*गुलाबी होंठ तेरे है, नशीली आँख लगती है।* *करें किससे तेरी उपमा, तू खासम खास लगती है।।* *जो सपने में तू आती है, तो चांदनी रात लगती है।* *ये सब कहते है, पर मुझको तू लल्लनटॉप लगती है।।* ✍✍✍ *@P.T* *प्रभात तिवारी अमन*"

*गुलाबी होंठ तेरे है, नशीली आँख लगती है।*                      
*करें किससे तेरी उपमा, तू खासम खास लगती है।।*
*जो सपने में तू आती है, तो चांदनी रात लगती है।*
*ये सब कहते है, पर मुझको तू लल्लनटॉप लगती है।।*
              ✍✍✍ *@P.T*
        *प्रभात तिवारी अमन*

*गुलाबी होंठ तेरे है, नशीली आँख लगती है।* *करें किससे तेरी उपमा, तू खासम खास लगती है।।* *जो सपने में तू आती है, तो चांदनी रात लगती है।* *ये सब कहते है, पर मुझको तू लल्लनटॉप लगती है।।* ✍✍✍ *@P.T* *प्रभात तिवारी अमन*

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