तुम संग संग चले मेरे राह ए इश्क़ आसां हो गयी तुझ सं

तुम संग संग चले मेरे
राह ए इश्क़ आसां हो गयी
तुझ संग अधूरी ज़िंदग़ी
एक मुकम्मल दास्तां हो गयी।
कल तक वीरान थी मेरी दुनिया
आज एक महकता गुलिस्तां हो गयी।
नाक़ामियाँ पनाहगार थी बेहिसाब
तुझसे जुड़ा तो किस्मत मेहरबाँ हो गयी।
अँधेरी थी महफिलें तुझ बिन
तू जो आई, रोशन हर शमां हो गयी।
लफ्ज़ भी न फूटे ज़ुबाँ से मेरे
ये दास्तां तो सिर्फ़ आँखों से बयां हो गयी।

तुम संग संग चले मेरे राह ए इश्क़ आसां हो गयी तुझ संग अधूरी ज़िंदग़ी एक मुकम्मल दास्तां हो गयी। कल तक वीरान थी मेरी दुनिया आज एक महकता गुलिस्तां हो गयी। नाक़ामियाँ पनाहगार थी बेहिसाब तुझसे जुड़ा तो किस्मत मेहरबाँ हो गयी। अँधेरी थी महफिलें तुझ बिन तू जो आई, रोशन हर शमां हो गयी। लफ्ज़ भी न फूटे ज़ुबाँ से मेरे ये दास्तां तो सिर्फ़ आँखों से बयां हो गयी।

तुम जो आये ज़िन्दगी में तुम संग संग चले मेरे
राह ए इश्क़ आसां हो गयी
तुझ संग अधूरी ज़िंदग़ी
एक मुकम्मल दास्तां हो गयी।
कल तक वीरान थी मेरी दुनिया
आज एक महकता गुलिस्तां हो गयी।
नाक़ामियाँ पनाहगार थी बेहिसाब
तुझसे जुड़ा तो किस्मत मेहरबाँ हो गयी।
अँधेरी थी महफिलें तुझ बिन
तू जो आई, रोशन हर शमां हो गयी।
लफ्ज़ भी न फूटे ज़ुबाँ से मेरे
ये दास्तां तो सिर्फ़ आँखों से बयां हो गयी।

©पीयूष राज

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