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White शीर्षक - हम न तुम ... ************* सच न र

White शीर्षक - हम न तुम ...

*************

सच न रात न लम्हें होते हैं।

बस न सच न कोई होता हैं।


अकेले आना जाना जीवन है 

उम्र के रंगमंच पर हम होते हैं।


सोच हमारी अपनी होती हैं।

जिंदगी में सच कहां होते हैं।


चाहत चांद सूरज कुदरत है।

मन भाव में हम-तुम होते हैं।


जिंदगी की राह हम सोचते हैं।

सांसों के साथ सब अकेले हैं।


न कल की सोच आज ही हम हैं।

रात का सच क्या झूठ होता हैं।


हम न तुम बस मन के साथ हैं।

आज हम तुम न कल होता है।

********

नीरज कुमार अग्रवाल चंदौसी उ.प्र

©Neeraj kumar Agarwal chandausi u.p #Thinking 
#neeraj_poetry
White शीर्षक - हम न तुम ...

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सच न रात न लम्हें होते हैं।

बस न सच न कोई होता हैं।


अकेले आना जाना जीवन है 

उम्र के रंगमंच पर हम होते हैं।


सोच हमारी अपनी होती हैं।

जिंदगी में सच कहां होते हैं।


चाहत चांद सूरज कुदरत है।

मन भाव में हम-तुम होते हैं।


जिंदगी की राह हम सोचते हैं।

सांसों के साथ सब अकेले हैं।


न कल की सोच आज ही हम हैं।

रात का सच क्या झूठ होता हैं।


हम न तुम बस मन के साथ हैं।

आज हम तुम न कल होता है।

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नीरज कुमार अग्रवाल चंदौसी उ.प्र

©Neeraj kumar Agarwal chandausi u.p #Thinking 
#neeraj_poetry