Princy verma

Princy verma Lives in New Delhi, Delhi, India

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"कुछ माता-पिता अपनी संतान को किसी दूसरे नगर में पढ़ने के लिए नही भेज पाते,चिंतित रहते हैं, कि उनकी संतान को पीड़ा न पहुँचे,इसलिए उसे बांध के रखते है,ये प्रेम नहीं हैं, ये मोह हैं, क्योंकि यदि वो चाहते कि उनकी संतान माता पिता की छांव से बाहर निकलकर संसार को देखे, उसे समझे, उससे ज्ञान ले, अपने अनुभवों से सिखकर अपना स्वयं का व्यक्तित्व बनाये। तो ये माता पिता का अपनी संतान के प्रति प्रेम हैं। मोह से भय पैदा होता हैं और प्रेम से केवल आंनद , इसलिए बाँधये मत, मुक्त कीजिये,क्योंकि यहीं प्रेम हैं। #NojotoQuote"

कुछ माता-पिता अपनी संतान को किसी दूसरे नगर में पढ़ने के लिए नही भेज पाते,चिंतित रहते हैं, कि उनकी संतान को पीड़ा न पहुँचे,इसलिए उसे बांध के रखते है,ये प्रेम नहीं हैं, ये मोह हैं, क्योंकि यदि वो चाहते कि उनकी संतान माता पिता की छांव से बाहर निकलकर  संसार को देखे, उसे समझे, उससे ज्ञान ले, अपने अनुभवों से सिखकर अपना स्वयं का व्यक्तित्व बनाये। तो ये माता पिता का अपनी संतान के प्रति प्रेम हैं।
       मोह से भय पैदा होता हैं और प्रेम से केवल आंनद , इसलिए बाँधये मत, मुक्त कीजिये,क्योंकि यहीं प्रेम हैं। #NojotoQuote

 

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"Not every girl Dreams to get married ... some girls want to work for their country..."

Not every girl Dreams to get married ...
some girls want to work for their country...

 

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"थक गयी हूँ , अच्छाई का रास्ता अपनाते अपनाते। जो इंसान किसी को कुछ भी कड़वा ना बोलता हो वो अगर कभी कुछ थोड़ा सा बोल भी दे, तो लोग उसकी सारी अच्छाई को भुलाकर उस एक शब्द पर अटक जाते हैं। इससे अच्छा हैं किसी से कुछ बोलो ही ना।"

थक गयी हूँ , अच्छाई का रास्ता अपनाते अपनाते।
जो इंसान किसी को कुछ भी कड़वा ना बोलता हो वो अगर कभी कुछ थोड़ा सा बोल भी दे, तो लोग उसकी सारी अच्छाई को भुलाकर उस एक शब्द पर अटक जाते हैं। इससे अच्छा हैं किसी से कुछ बोलो ही ना।

 

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"थक गयी हूँ , अच्छाई का रास्ता अपनाते अपनाते। जो इंसान किसी को कुछ भी कड़वा ना बोलता हो वो अगर कभी कुछ थोड़ा सा बोल भी दे, तो लोग उसकी सारी अच्छाई को भुलाकर उस एक शब्द पर अटक जाते हैं। इससे अच्छा हैं किसी से कुछ बोलो ही ना।"

थक गयी हूँ , अच्छाई का रास्ता अपनाते अपनाते।
जो इंसान किसी को कुछ भी कड़वा ना बोलता हो वो अगर कभी कुछ थोड़ा सा बोल भी दे, तो लोग उसकी सारी अच्छाई को भुलाकर उस एक शब्द पर अटक जाते हैं। इससे अच्छा हैं किसी से कुछ बोलो ही ना।

 

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