Nishat Hashmi

Nishat Hashmi Lives in Kota, Rajasthan, India

क्या लिखूं खुद के बारे में, खुद से अनजान हूं मैं। यूं तो दुनिया की भीड़ का हिस्सा हूं, पर खुद की नज़र में अदभुत पहचान हूं मैं। & All my creations are just my fantasies. They have nothing to do with my real life.

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"तुझे बंदिशो में बांधे किसमें इतनी हिम्मत है। तू खोल जंजीरे आगे बढ़, तुझे किसने कहा यही तेरी किस्मत है। माज़ी को मत कर याद, मुस्तकबिल को देख तुझ पर तो खुदा की बड़ी इनायत है।"

तुझे बंदिशो में बांधे 
किसमें इतनी हिम्मत है।
तू खोल जंजीरे आगे बढ़,
तुझे किसने कहा
यही तेरी किस्मत है।
माज़ी को मत कर याद,
मुस्तकबिल को देख
तुझ पर तो खुदा की बड़ी इनायत है।

1.maazi-past. 2.mustakbil-future
#Nojoto#Nojotohindi#Poetry#Bandishe#maazi#mustakbil#inayat#shayri

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"#DearZindagi Ham to sada bahar ke phulon jese the. Subah ki pahli kiran se hi khil uthte the. Tumne hame suraj mukhi jesa bna diya Ab to Jab tak tum nhi aate, ham bhi nhi khilte."

#DearZindagi Ham to sada bahar ke phulon jese the.
Subah ki pahli kiran se hi khil uthte the.
Tumne hame suraj mukhi jesa bna diya
Ab to Jab tak tum nhi aate, ham bhi nhi khilte.

#Nojoto#Life

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"मन मन में दृढ़विश्वास कर हार को हराने की बात कर लक्ष्य हो जो तेरा उसे पाने की बात कर मन ही मन खूब सोचा है अब कर दिखाने की बात कर मन में दृढ़विश्वास कर हार को हराने की बात कर "

मन मन में दृढ़विश्वास कर
हार को हराने की बात कर
लक्ष्य हो जो तेरा 
उसे पाने की बात कर
मन ही मन खूब सोचा है
अब कर दिखाने की बात कर
मन में दृढ़विश्वास कर
हार को हराने की बात कर

#wod#Life#2liner#Motivation

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"आँखों में उम्मीद थी और दिल में थी आशा तोड़ के बंधन मैं आगे बढ़ा ज़रा सा मंजिल की चाह ने खिंचा इस तरह लोग देखते रह गए तमाशा"

आँखों में उम्मीद थी  और दिल में थी आशा तोड़ के बंधन मैं
आगे बढ़ा ज़रा सा
मंजिल की चाह ने खिंचा इस तरह
लोग देखते रह गए तमाशा

#2liner#Motivation#Life

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"#क्यूंकि तू कुएं के मेंढक जैसा है, तूने बाहर निकल कर कहाँ देखा है? जो भी बंधन है सब तेरे अंदर है। बाहर तो सूरज की चमकती रेखा है। बाहर निकल आगे बढ़ तूने कब पर्दो में रहना सीखा है? घर की दिवार के सिवा बाहर कब किसी ने रोका है?"

#क्यूंकि तू कुएं के मेंढक जैसा है,
तूने बाहर निकल कर कहाँ देखा है?
जो भी बंधन है 
सब तेरे अंदर है।
बाहर तो सूरज की चमकती रेखा है।
बाहर निकल  आगे बढ़
तूने कब पर्दो में रहना सीखा है?
घर की दिवार के सिवा
 बाहर कब किसी ने रोका है?

#क्यूंकि#Nojoto#hindipoetry#NishhShayri

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