RAJ SINGH ✔️

RAJ SINGH ✔️ Lives in Buxar, Bihar, India

 Raj singh is a Bhojpuri film singer, Writer, actor, and television presenter. He is most promising actor, with 16 successfully released audio as well as video songs .Raj Singh was born in 1996 at Hethua Buxar India. Raj singh facebook officel page  RAJ SINGH /FACEBOOK

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और फिर वक़्त आ गया था जाने का.. जाने के वक़्त को कभी नहीं आना चाहिए ये हमारे जाने में हमें चिढ़ाता है। मैं थोड़ा असहज था और वो मानो पूरे तरीके से प्रैक्टिस कर के आई थी। सड़क का ट्रैफिक हमारे एकांत वाले इश्क़ को हॉर्न मार मार के डिस्टर्ब कर रहा था। मैंने सोचा काश ये जाना किसी एकांत जगह पर होता कहीं सड़क किनारे सूनसान में हम शांत बैठे रहते कुछ देर को। जाने से पहले जो २ मिनट की चुप्पी होती है न दरअसल वही एक अल्फ़ाज़ होता है कि जाना हमें कितना अखर रहा है।

मैंने पिछली रात उसके लिए एक लेटर लिखकर बैग में डाल लिया था। सोचा फ़िल्मी अंदाज में इसको अपने दिल की तरह सँभालते हुए बैग से निकालूंगा और चूमते हुए उसके हाँथ में रख दूंगा। वो शरमा जाएगी और मैं उसका हाँथ पकड़ कर अपने जज़्बातों की गर्मी से उसे वाकिफ़ कराऊंगा। लेकिन हक़ीक़त कुछ और ही थी। यहाँ मेरे सोचने जैसा एकांत नहीं था, हम दोनों के पास थोड़ा और बैठने का वक़्त नहीं था। ज़िंदगी की अच्छी - बुरी घटनाओं को सोचने में जो मज़ा है वो उसे जी लेने में हरगिज़ नहीं है। इसी लिए कभी कभी कुछ चीजें सिर्फ सोचनी ही चाहिए।

[ऐसे जल्दबाजी में मेरा लेटर देना सही रहेगा या नहीं.. एक काम करता हूँ अगली दफे दे दूंगा। अरे नहीं-नहीं जाते जाते कुछ तो यादगार देता जाऊँ.. लेकिन माहौल कहाँ है ऐसा कुछ.. वो कहीं पूछ पड़ी ये क्या है तो? हटाओ नहीं देता हूँ।]

मेरे साथ अक्सर ये होता है कि एक दूसरा इंसान आ जाता है मुझमें जिससे मैं हूबहू बातें कर सकता हूँ। जाने-अनजाने हमारे बीच का खाली एकांत मेरे अंदर का वो दूसरा आदमी खाता रहा। मैं ये सोच ही रहा था कि उसकी आवाज़ आई -

"कब आओगे ?"

"जल्दी ही" मैं मुस्कुराया..

[दे ही दूँ.. उसे मेरा लिखा हरदम पसंद आता है, और ये तो मैंने सिर्फ उसके लिए ही लिखा है। उसने कल ही मुझसे कहा था कि तुम फीलिंग्स बहोत अच्छे से एक्सप्लेन करते हो।]

"तुम बहुत याद आओगे" वो दोबारा बोल पड़ी

"तुम भी" मैं फिर मुस्कुराया..

[लेटर में मैंने सब कुछ लिख रखा है.. और कुछ जज़्बातों को अनकहा रखना भी जरुरी होता है। इसमें कुछ ज्यादा ही सेंटी हो गया मैं। एक काम करता हूँ घर जा के दूसरा लेटर लिखूंगा और इसके पते में पोस्ट कर दूंगा। हटाओ.. नहीं देता हूँ।]

"कोई टैक्सी क्यों नहीं दिख रही है" उसने हड़बड़ाहट में कहा

"पता नहीं" मैं फिर मुस्कुराया और बैग से अपना दिल आहिस्ते से निकाल कर उसके हांथो में रख दिया। उसने पलट कर नहीं पूछा "ये क्या है" शायद उसे पता था। वो मुस्कुराई, मैं मुस्कुराया। टैक्सी आ चुकी थी जैसे उसे इंतजार रहा हो मेरे लेटर देने का। मैंने उसे आहिस्ता से गले लगाया। वो ना बोलने जैसा 'थैंक यू' बोल पड़ी। मैं टैक्सी में बैठ गया।

हम दोनों ने एक दूसरे को देखा, टैक्सी चल पड़ी.. 'नहीं देना चाहिए था' मैं फिर सोच पड़ा.. और इस बार फिर मुस्कुराया।

सड़क में ट्रैफिक था या नहीं ये याद नहीं मुझे लेकिन मेरी साँसे तेज़ थीं। उसकी भी रही होंगी.. मेरे जाने के बाद वो थोड़ी देर खड़ी रही होगी, वापस घर जाते हुए उसने एकांत में स्कूटर जरूर रोका होगा और मेरा ख़त बड़े ही एहतियात से तकिये के नीचे जरूर रखा गया होगा.. ये सब अगले ख़त में पूछ लूंगा।

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BY-RAJ-SINGH
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"वो रातें ख़ुशनसीब होती हैं जिनमें बलिस्ता तुम्हारी बाँहों का होता है.❤️"

वो रातें ख़ुशनसीब होती हैं जिनमें बलिस्ता तुम्हारी बाँहों का होता है.❤️

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"बलात्कार में सेक्स की चाह से ज्यादा किसी बेहतर 'चीज' को हासिल न कर पाने की कुंठा शामिल होती है. जैसे किसी चमचमाती ऑडी कार को देखकर मनचले लौंडे बाजु से गुजरते हुए उस पर पत्थर से स्क्रैच मार कर उसे बिगाड़ने का सुख पाते हैं, वैसा ही ये बलात्कार होता है. जब उसे ये नहीं पा सकते, तो मौका पाते ही उस पर हावी होकर उसके मन, शरीर और जीवन पर नासूर ज़ख्म उकेर देते हैं.

यह पुरुषवादी कुंठा सुनसान गली मोहोल्लों तक ही सिमित नहीं, जब पति अपनी पत्नी का मन नहीं जीत पाता, तब भी उसकी मर्ज़ी के खिलाफ़ उसे शादी का लाइसेंस दिखा कर बलात्कार करता है, और वो स्त्री अपने ही ज़ख्मों में लहूलुहान इस सामाजिक मान्यता प्राप्त बलात्कार को हर रात सिसकते हुए सहती जाती है."

― राज
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