Aman mehra

Aman mehra Lives in Jabalpur, Madhya Pradesh, India

insta lafz644 facebook Aman mehra

  • Popular
  • Latest
  • Video

"कभी थक हार कर, हम इस जहां के बदलने का इंतज़ार किया करते हैं। कभी बिखर कर हम खुद-ब-खुद जुड़ने का इंतज़ार किया करते हैं। ईन कागज की कश्ती का बारिश में तैरने का इंतज़ार किया करते हैं। तबियत ठीक नहीं है जख्म है जो हमारे तेरे पुछने का इंतज़ार किया करते हैं। अंधेरी परछाई को देखना हैं जो तुम सी नजर आती हैं हम आफ्ताव का इंतज़ार किया करते हैं।"

कभी थक हार कर, 
हम इस जहां के बदलने का 
इंतज़ार किया करते हैं। 

कभी बिखर कर 
हम खुद-ब-खुद जुड़ने का 
इंतज़ार किया करते हैं।

ईन कागज की कश्ती का
बारिश में तैरने का 
इंतज़ार किया करते हैं।

तबियत ठीक नहीं है 
जख्म है जो हमारे 
तेरे पुछने का 
इंतज़ार किया करते हैं।

अंधेरी परछाई को देखना हैं 
जो तुम सी नजर आती हैं 
हम आफ्ताव का
इंतज़ार किया करते हैं।

 

142 Love
10 Share

please listen it and like share and suscribe

46 Love
78 Views

please like share and subscribe

42 Love

"माँ मैं हार भी जाऊ तो मेरे जितने का इंतजार करती हैं, मै रो दू तो मेरे हँसने का इंतज़ार करती हैं, उसकी दुआ भी मेरे कदमो के साथ चलती है, उसका पल्लु मुझे हर धूप से बचाता है, वो जब मुझे मिलती हैं महीनो के बाद, तो कुछ कहती नही, क्योकी ऑखे कहती है तुझे बहुत याद किया मेने । रह जाती हैं वह मुस्कुराते जब घर से जाने लगता हु, उस हसी मे कई गम छुपा लेती है वो फिर से मेरे लौटने का इंतज़ार किया करती है।"

माँ मैं हार भी जाऊ तो मेरे जितने का इंतजार करती हैं, 
मै रो दू तो मेरे हँसने का इंतज़ार करती हैं, 
उसकी दुआ भी मेरे कदमो के साथ चलती है, 
उसका पल्लु मुझे हर धूप से बचाता है, 
वो जब मुझे मिलती हैं महीनो के बाद, 
तो कुछ कहती नही, 
क्योकी ऑखे कहती है 
तुझे बहुत याद किया मेने ।

रह जाती हैं वह मुस्कुराते जब घर से जाने लगता हु,
उस हसी मे कई गम छुपा लेती है 
वो फिर से 
मेरे लौटने का इंतज़ार किया करती है।

for love of my life
always love you 3000 mom
everyday everytime

38 Love

"अपने अल्फ़ाज को लिखकर मे, हर बार तुझे पढता हूँ, मेरे हर लफ्ज मे तेरा ज्रिक हैं, कुछ जानने की चाहत है पर ये कहने को जी नहीं चाहता, सोचता हूँ कि तु खुद ही समझ जाए, किसी दिन पर वो दिन तलक, हमे क़यामत तक ना मिले"

अपने अल्फ़ाज को लिखकर मे, 
हर बार तुझे पढता हूँ, 
मेरे हर लफ्ज मे तेरा ज्रिक हैं,
 कुछ जानने की चाहत है 
पर ये कहने को जी नहीं चाहता, 
सोचता हूँ कि तु खुद ही समझ जाए,
 किसी दिन 
पर वो दिन तलक, 
हमे क़यामत तक ना मिले

#Muh_par_raunak

37 Love