poet kv singh bhadresh

poet kv singh bhadresh"केशवम" Lives in Barmer, Rajasthan, India

kaviraj kv singh bhadresh

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"अपने-पराये वो अपना होकर भी अपना हो न पाया... वो पराया होकर भी सितम में काम आया... ऐ ख़ुदा तेरे खेल निराले..... मैं कभी इनको समझ न पाया... _"केशवम""

अपने-पराये वो अपना होकर भी अपना हो न पाया...
वो पराया होकर भी सितम में काम आया...
ऐ ख़ुदा तेरे खेल निराले.....
मैं कभी इनको समझ न पाया...

_"केशवम"

 

46 Love

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"हार और जीत कभी जीत कर भी हो जाती हैं हार... तो कभी हार कर भी हो जाती है जीत... समझना इस बात को... ये ही हैं इस जहां की रीत.... keshavam"

हार और जीत कभी जीत कर भी हो जाती हैं हार...
तो कभी हार कर भी हो जाती है जीत...
समझना इस बात को...
ये ही हैं इस जहां की रीत....
keshavam

#jeet

44 Love

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"एक बार और उलझना है तुमसे एक बार और उलझना है तुमसे... शायद इससे जिंदगी सुलझ जाए...."

एक बार और उलझना है तुमसे एक बार और उलझना है तुमसे...
शायद इससे जिंदगी सुलझ जाए....

प्यार

40 Love

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"वादें टूट जाते हैं जब वादे टूट जाते है जब... तब पसर जाता हैं गम ... न टूटने देना इश्क को... ये बात मेरी है मोहब्बत की ... केशवन"

वादें टूट जाते हैं जब वादे टूट जाते है जब...
तब पसर जाता हैं गम ...
न टूटने देना इश्क को...
ये बात मेरी है मोहब्बत की ...
केशवन

 

33 Love

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"मेरे भावो की थी वो भावना.. या मेरे रूह की वो कामना... मेरे ह्रदय की वो धड़कन... या मेरे कविता की थी वो कल्पना.... वो कविता थी कल्पना-सी.... वो मोहब्बत थी अलग-सी... वो इश्क था अलग सा...."

मेरे भावो की थी वो भावना..
या मेरे रूह की वो कामना...
मेरे ह्रदय की वो धड़कन...
या मेरे कविता की थी वो कल्पना....
वो कविता थी कल्पना-सी....
वो मोहब्बत थी अलग-सी...
वो इश्क था अलग सा....

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32 Love
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