Jajbaat-e-Khwahish(जज्बात)

Jajbaat-e-Khwahish(जज्बात)

एक जज्बात अपनी ख़्वाहिश की तलाश में... हमारी दूसरी रचनाएं मेरी आवाज 🎙️में सुनने के लिए मेरे नीचे वेबसाइट 🌐 आइकॉन को टच करे। रचनाएं अच्छी लगे तो चैनेल 🎬सब्सक्राइब करे। फॉलोवर से निवेदन है कि मेरी रचनाए अगर अच्छी लगे तो फॉलो करें और साथ ही साथ जो कृति अच्छी लगे वो लाईक करे। 💐💐💐

https://youtu.be/6dfQhn3JihM

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#Dreams #कहो तो फिर एक नई बात लिखूं

"कहो तो आज फ़िर नई बात लिखूं"

कहो तो आज फ़िर नई बात लिखूं
अपने आखों के अनकहे जज्बात लिखूं

लिख देती है कलम स्याह के मुकद्दर,

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यकीनन सारे क़ासिद मुखालिफ-ए-गिरेबाँ हो गए
#शायरी
दजाबंदी-ए-इश्क : छिपा हुआ प्यार।
अहल-ए-शहर-ओ-जुबां: सुंदर से शहर के सभी लोगो के जुबान पर।
काशिद:संदेशवाहक।
मुखालिफ-ए-गिरेबां:विरोधी के साथ के।
मुहाफिज:वक़ील।
ग़फ़लत-नूर-ए-सादगी: चेहरे पे झूठी सादगी।

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"कभी लग गई तो है ये जहर जिंदगी" https://youtu.be/kt3hrK3jjEs

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कविता:तन्हाई

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हुस्न-ए-दरिया

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