राज प्रताप यादव

राज प्रताप यादव

civil service aspirant

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"एक ख्वाव सजाया था मैंने आंखों की अधूरी कस्ती पर । मै सोया था इश्क मुकम्मल को ,बिखरा तेरे दहलीज़ की रंगत पर । बो सलवटे तेरी बंद आंखों की अशुओ की तासीर पर थी ,है हकीकत तेरा मुकर जाना ,जो इनायत तेरी सरेआम थी। ये मंज़र मौत के करीब से सफर कर रहा था । मैने यकीनन मोहब्बत का सोख पाल रखा था ।"

एक ख्वाव सजाया था मैंने आंखों की अधूरी कस्ती पर ।
मै सोया था इश्क मुकम्मल को ,बिखरा तेरे दहलीज़ की रंगत पर ।
बो सलवटे तेरी बंद आंखों की अशुओ की तासीर पर थी ,है हकीकत तेरा मुकर जाना ,जो इनायत तेरी सरेआम थी।
ये मंज़र मौत के करीब से सफर कर रहा था ।
मैने यकीनन मोहब्बत का सोख पाल रखा था ।

ख्वाबो की दुनिया ।

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गुम नाम जिंदगी ।

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"तुझे चंचल चांदनी समझा था । तू काली रात अंधेरा थी । खुदा ने बख्खसिस दी तुझको । तू रंग बदलती दुनिया थी । तू लहरों के संग बहती थी । आखिर पतवार किनारा थी । जो बीच मे डूबा राही था । तू पश्चिम पवन सुनामी थी । तू वीराने की बेगम थी । हर चिराग बुझाये बैठी थी । कोहिनूर सा चेहरा तेरा , धोके का तरकस सम्भाले बैठी थी । तू जंगल की गमगीन दिशा थी । झा बाघो की आहट रहती थी । तपन से जो ना पीसीज सका । तू ऐसे बे बक्त का फेका पथ्थर थी । राज प्रताप यादव।"

तुझे चंचल चांदनी समझा था ।
तू काली रात अंधेरा थी ।
खुदा ने बख्खसिस दी तुझको ।
तू रंग बदलती दुनिया थी ।

तू लहरों के संग बहती थी ।
आखिर पतवार किनारा थी ।
जो बीच मे डूबा राही था ।
तू पश्चिम पवन सुनामी थी ।

तू वीराने की बेगम थी ।
हर चिराग बुझाये बैठी थी ।
कोहिनूर सा चेहरा तेरा ,
धोके का तरकस सम्भाले बैठी थी ।

तू जंगल की गमगीन दिशा थी ।
झा बाघो की आहट रहती थी ।
तपन से जो ना पीसीज सका ।
तू ऐसे बे बक्त का फेका पथ्थर थी ।

राज प्रताप यादव।

 

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"ये कैसा आलम है तेरे बिना । कतरा कतरा भी कह कर निकला आंखों से, एक बार फिर से जियूँ तेरे बिना । अब तुमसे मुलाकात करने का क्या फायदा। कोई और कह रहा था कल नही जी पाएंगे अब तेरे बिना । मैने उम्र गुज़ार दी काश में तुम्हारे अल्फ़ाज़ कहां नीलम हो गए । उस बिस्तर में आज भी तेरे जिस्म की खुश्बू है । जिसे महसूस करता हु तेरे बिना । Raj pratap yadav."

ये कैसा आलम है तेरे बिना ।
कतरा कतरा भी कह कर निकला आंखों से,
एक बार फिर से जियूँ तेरे बिना ।
अब तुमसे मुलाकात करने का क्या फायदा।
कोई और कह रहा था कल नही जी पाएंगे अब तेरे बिना ।
मैने उम्र गुज़ार दी काश में तुम्हारे अल्फ़ाज़ कहां नीलम हो गए ।
उस बिस्तर में आज भी तेरे जिस्म की खुश्बू है ।
जिसे महसूस करता हु तेरे बिना ।
    Raj pratap yadav.

तुम साथ होते अगर

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